खुली खदानें बिगाड़ रही हैं सेहत

खुली खदानें बिगाड़ रही हैं सेहत

Please comment, What do you feel? The main cause of pollution in Jharia is Open Mining?

According to The Jharia Coalfield Bachao Samiti… झरिया कोल फील्ड को प्रदुषण में एक नंबर बनाया किसने है। सिर्फ OCP से ही प्रदुषण बढ़ा है। बीसीसीएल आदमी की जान को भेड़ बकरी समझती है। इसलिए कोयला निकालने को लगी है वो भी आउट सोर्सिंग से। ये काम ठेके पर दिया गया है। इसका मतलब जनता खूब समझती है। जनता जाए आग में। सिर्फ कोयला निकालना , पैसा कमाना चाहते हैं। आप क्या आदमी नहीं हो ?
झरिया कोल फील्ड की जानता जागेगी तब ………
हमारा कहना है कि तुरंत OCP बंद करें। शायद यह इनकी अब मज़बूरी है।

झरिया में प्रदुषण का असर देखे। आज कोई १० दिनो झरिया शहर के हर मकान में कोयला के महीइन्न कन की एक परत जम जाती है। सफाई में परेशानी हो रही है। पहले ऐसा नहीं होता था । यह सब ओसीपी खुली खदान से खनन के कारण हो रहा है। झरिया शहर में रहने वाले लोगों को इसका असर दिखाई दे रहा होगा।
क्या बीसीसीएल , भारत सरकार की जिम्मेदारी नहीं है कि इसे रोके ? और डीसी एवम् कमिश्नर,हजारीबाग कोभी इसका संज्ञान लेना चाहिए। जनता को देखने उनकी दिक्कतों को दूर करने के लिए — अधिकारी, जनप्रतिनिधि भी होते हैं। क्या झकझोरने से ही जागेंगे।
जनता की मजबूरी को भी समझना जरूरी होता है।

दोस्तों आपको पता है कि झरिया प्रदुषण के मामले में पुरे भारत में नंबर वन पर पहुँच गयी हैं । यहाँ के लोगो का रहना मुश्किल हो गया हैं । जब दिल्ली में ऑक्सीजन बिकना चालू हो गया है, वो दिन दूर नहीं जब झरिया में भी प्रदुषण के चलते लोगो का साँस लेना मुश्किल हो जाएगा । अभी भी यह हाल हो ही गया है, बहुत सारे इलाकों में तो प्रदुषण का स्तर इतना ज्यादा हैं कि लोग बीमार पड़ रहे हैं । आज के प्रभात खबर अख़बार में यह मुद्दा बहुत जोर शोर से उठाया गया हैं ।

लोगो का और यहाँ के समाज सेवा संस्था झरिया कोलफील्ड बचाओ समिति का कहना है कि यहाँ पहले प्रदुषण नहीं था, जब से यहाँ ओपन माइनिंग शुरू हुई है, यहाँ प्रदुषण बहुत ही ज्यादा बढ़ गया हैं ।

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100 साल से क्यों सुलग रहा #Jhakhand का शहर ‘झरिया’, जहां धरती के नीचे है आग का दरिया

Jharia Burning 100 Years
Jharia Burning 100 Years

झारखंड के धनबाद ऐसा जिला हैं जो कोयले की खान के लिए जाना जाता है। यहां पर झरिया एक ऐसा शहर है जहां पर सबसे अधिक मात्रा में अच्छी क्वालिटी का कोयला पाया जाता है। पुरे झारखंड में सबसे अधिक कोयला इसी स्थान पर पाया जाता है। इसी झरिया से पुरे वर्ल्ड में कोयला निर्यात किया जाता हैं । पुरे देश में उद्योगों के लिए कोयला यही से जाता हैं ।

इस कोल् फायर एरिया में जमीन 100 सालों से आग से धधक रही है। इसकी वजह से वहां के स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी काफी बुरा असर पड़ रहा है। स्थानीय लोग इससे बहुत परेशां हैं और यहाँ के प्रदुषण के चलते लोग बीमार हो रहे हैं । पिने का पानी भी साफ़ नहीं आता हैं ।

Jharia Like Hell
Jharia Like Hell

स्थानीय लोगों का कहना है कि- जब इस इलाके में बारिश होती है तब कोयले का काला विषैला पानी हमारे घरों के अंदर आ जाता है इसके साथ काफी जहरीला धुंआ भी घरों के अंदर आ जाता है जिससे सांस लेने में काफी परेशानी होती है। जमीन के अंदर 24 घंटे आग लगे रहने के कारण जमीन के धंसने का भी खतरा हर वक्त बना रहता है।

बारिश में बढ़ती जमीन की दहक

बारिश शुरू होने के साथ ही झरिया की जमीन की दहक और बढ़ जाती है। जमीन से निकल रहीं गैसें हवा को जहरीला बना रहीं हैं। राजापुर, लिलोरी पथरा, बस्ताकोला, घनुडीह, इंदिरा चौक, बरारी समेत कई इलाके हैं जहां भू-धंसान और गोफ की घटनाएं लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं। बारिश होने के बाद यहाँ की ज़िन्दगी नर्क के सामान हो जाती हैं । लोग चाहते हैं कि वो अच्छी और सेफ जगह में रहे ताकि वो बेचैन होकर ज़िन्दगी जी सकें ।

विशेषज्ञों की मानें तो भूमिगत आग के कारण कोयला राख हो जाता है। ऐसे में जमीन खोखली होने पर धंस जाती है। एक अन्य कारण भी है। कोयला निकालने के बाद खाली स्थान पर बालू नहीं भरी गई। बारिश के कारण पानी जमीन में प्रवेश करता है। पानी से मिट्टी कटाव के कारण धंसान हो जाता है। अवैध खनन ने इस समस्या को और भी बढ़ाया है।

Watch how Jharia, A city of Jharkhand, is sitting on an inferno for 100 years | Exclusive

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The Most Polluted City 2020 : Jharia, Dhanbad is the second one

झरिया देश का सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर

A latest survey came and it is found that Jharia has become the most polluted city in India and Dhanbad is the second one after Jharia. I remember, 5 years ago, Dhanbad was the most polluted city and now took second position. Greenpeace India has shared their new report on the pollution level of India and people of Jharia and Dhanbad shocked to know about it.

The Most Polluted City 2020 : Jharia
The Most Polluted City 2020 : Jharia

It is true also. The pollution level of Jharia and Dhanbad are very high due to its coal mining.

Jharkhand’s Jharia most polluted city in India: Green India Report




Jharkhand’s Dhanbad, which is known for its rich coal area and reserves and many industries are there, is the second-most polluted city in India, which is told by the report based on analysis of PM10 data from 287 cities across the country.

And If you want to know the least polluted city, we will tell you that according to that Green Indian report, Lunglei in Mizoram is the least polluted followed by Meghalaya’s Dowki.

Top 10 Polluted Cities in India



Six of the top-10 polluted cities are in Uttar Pradesh — Noida, Ghaziabad, Bareilly, Allahabad, Moradabad and Firozabad

  1. Jharia
  2. Dhanbad
  3. Noida
  4. Gaziabad
  5. Ahmedabad
  6. Bareilly
  7. Allahabad
  8. Moradabad
  9. Firozabad
  10. New Delhi

Delhi is the 10th-most polluted city in India, it was at the eighth spot a year ago.

झरिया देश का सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर
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देश के प्रदूषित शहरों में झरिया- धनबाद का स्थान पहले नंबर पर

Jharia Coalfield Bachao Samiti

Jharia Coalfield Bachao Samiti

Jharia Coalfield Bachao Samiti
Jharia Coalfield Bachao Samiti

Official Facebook : https://www.facebook.com/jhariacoalfieldbachao.samiti

Whom To Contact: 083404 45564

Year of Found – 23 July 1994

About Jharia Coalfield Bachao Samiti

A non-governmental organisation called Jharia Bachao Andolan Samiti (Save Jharia Movement Committee) has been fighting for safe mining, proper rehabilitation and fire fighting since 1994. Many other small groups have also been formed [3].

I want to share the points which has been raised by Jharia Coalfield Bachao Samiti here: Have a look!

Jharia Coalfield Bachao Samiti : Coal india और भारत सरकार झरिया से coking कोयला निकाल कर बर्बाद कर रही है।इसे पॉवर प्लांट को भेजा जाता है । जिस पर सिंफर के वैज्ञानिकों ने भी चिंता जताई है। बड़े दुख की बात है कि GOI—CIL कोई इसे सुनता नहीं है।

कोयला मंत्री पीयूष गोएल ने 14.06.2016 को धनबाद आकर कहा था कि झरिया की जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा । यहां से कोयला नहीं निकाला जाएगा ।झरिया कोल फील्ड बचाओ समिति ने इसका स्वागत किया और कहा कि बीसीसीएल तुरंत यहां से कोयला उत्पादन बंद करे। झरिया वाले खुश रहेंगे और सरकार को भी एक बड़े राजस्व का लाभ होगा। मुआवजा भी नहीं देना पड़ेगा।झारियाके लोग सुरक्षित रहेंगे।
लेकिन नेता लोग कहते कुछ और हैं करते कुछ और हैं। कब नेता सुधरेंगे। तभी झरिया का भला होगा।

Jharia Coalfield Bachao Samiti vs Coal India Limited on 21 September, 2017

Check This Link : https://indiankanoon.org/doc/169740500/

You can read here also the whole side Jharia CoalField Bachao Samiti:

https://www.newsclick.in/how-coal-mining-jharia-causing-human-and-environmental-disaster

Life Of People In Jharia

Picture Says a Lot: See our Photography

Jharia and its fire underground
Jharia and its fire underground

About The Lives Of People In The Coalfields Of Jharia

Jharia is a city that is known for its coal fields which have been mined from 1894, during the time of the British rule. Such is the need of coal from this particular city that mining was done extensively without any attention given to the air and water pollution that it caused.

The first underground fire that happened was in 1916 and over the coming decades, about 17.32 square kilometers of land is under the rage of continuous fires. However due to efforts to cut down on their devastation, the fire raging has been curbed to 2.18 square kilometers.

Life Of People In Jharia Coalfields

Why is Jharia so important for coal mining when there are other coal fields available? The reason lies behind the quality of coal available in these mines which are the high grade ones needed to make steel. Hence the need for coal mined here is greater than in other places which remove the possibility of reduced mining and elimination of fires.

However, along with this need has plunged the life of people in the city of Jharia. For more than a century now, they are witnessing how the underground fire has raged through the city and everyday experience its negative effects.

Village homes constructed here are above the fires and it is not uncommon to see that the ground getting hot, cracking and suddenly tearing apart, causing fire and noxious gases to come into the home.

Jharia Coal Mine and People’s Life

Walls can be seen with cracks and are in a highly deteriorated state wherein they are crumbling heavily. Life expectancy of people living here has been reduced by ten years. The total number of families affected by fires is about 100,000 and they need to be relocated right away.

People who have been living in Jharia for the past century have endured with the many health problems arising from the pollution caused by underground fires.

Their daily food intake, the air they breathe and also their everyday life is charred with the smoke of fires raging around them. Many inhabitants who owned lands and homes here have had to abandon them, without any hope of salvaging on their ownership due to the heavy smoke and its ensuring health problems.

Diseases Due to coal mining, gas and Pollution

You can see so mny building structures falling apart and many homes heavily covered in soot and without their owners. People involved in coal mining develop black lung disease which can lead to lung cancer.

Sulphur, nitrogen and carbon oxides that get into the air pollute it and cause difficult respiratory diseases such as asthma and bronchitis.  Various gastrointestinal problems, hepatitis and other similar diseases affect people when they take in polluted water,

One of the key areas of concern is the rehabilitation of fire affected families into new homes, for which the Jharia Rehabilitation and Development Authority (JRDA) has an annual funding of 5 billion rupees but cannot put it into constructive use easily as they are unable to find proper lands for home construction.

A key area of concern is that most families living here are old fashioned and hence have extended living in many rooms inside a large property. So an appropriate plan has to be implemented to relocate them together amidst a scenario in which the properties that can be constructed today are just two bedroom ones for rehabilitation. 

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